उत्तराखंड

भक्ति के साथ ब्रह्म ज्ञान जरूरी, तभी जीवन में आएगा सच्चा आनंद- हेमराज शर्मा

एमडीडीए कॉलोनी में विशाल निरंकारी संत समागम, मानवता और एकता का दिया संदेश
देहरादून – राजधानी देहरादून की एमडीडीए कॉलोनी, केदारपुरम में शुक्रवार को विशाल निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सत्संग के दौरान भक्ति के साथ ब्रह्म ज्ञान, मानवता, सेवा, प्रेम और आपसी एकता को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया गया।

समागम में निरंकारी मिशन के प्रचार विभाग के कोऑर्डिनेटर हेमराज शर्मा ने सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि आज इंसान भक्ति कर रहा है, मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में जा रहा है, ईश्वर का स्मरण कर रहा है, लेकिन केवल बाहरी भक्ति से जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त नहीं किया जा सकता। जब तक मनुष्य को ब्रह्म का ज्ञान नहीं होता, तब तक उसके जीवन में स्थायी आनंद की अनुभूति अधूरी रहती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर अपने परिवार और बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता करता है। माता-पिता अपनी संतान के लिए अच्छे रोजगार, ऊंचे पद और सुख-सुविधाओं की कामना करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि व्यक्ति ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी अपने कर्मों में मानवता, ईमानदारी और सेवा की भावना नहीं रखता, तो उस उपलब्धि का वास्तविक अर्थ क्या है? उन्होंने कहा कि पद बड़ा होना पर्याप्त नहीं, कर्म भी बड़े होने चाहिए।

संत समागम में मानवता को केंद्र में रखते हुए कहा गया कि समाज में बढ़ती दूरी और भेदभाव को प्रेम और भाईचारे से ही कम किया जा सकता है। निरंकारी मिशन विश्वभर में एकता और मानवता की भावना को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। मिशन का संदेश है कि मनुष्य को जाति, धर्म, भाषा और अन्य सामाजिक भेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे को इंसान के रूप में देखना चाहिए।

हेमराज शर्मा ने कहा कि ब्रह्म ज्ञान मनुष्य की सोच और जीवन के दृष्टिकोण में बदलाव लाता है। जब व्यक्ति अपने अस्तित्व और परम सत्ता के संबंध को समझता है तो उसके भीतर अहंकार के स्थान पर विनम्रता, स्वार्थ के स्थान पर सेवा और द्वेष के स्थान पर प्रेम की भावना विकसित होती है। यही आध्यात्मिक जीवन की सार्थकता है।

समागम के दौरान संतों ने भजन और सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में आध्यात्मिक चेतना मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाने का कार्य करती है।

समागम का मूल संदेश स्पष्ट रहा कि सिर्फ भगवान से मांगना ही भक्ति नहीं, बल्कि ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर अपने कर्मों से मानवता की सेवा करना भी जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रेम, सेवा, सद्भाव और मानव एकता के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

मसूरी जॉन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने समागम में आए सभी लोगों का अभार प्रकट किया । मंच का संचालन सचिन पंवार ने किया।

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