उत्तराखंड

देहरादून में विशाल निरंकारी बाल संत समागम ,मिशन बच्चों को आध्यात्मिक विचारधारा से जोड़ता है

देहरादून  –  प्यार एकता और ज्ञान का संगम है निरंकारी बाल संत समागम, वर्तमान परिवेश में आधुनिक एवं वैज्ञानिक स्तरीय शिक्षक व्यवस्था जहां एक और बच्चों के वैज्ञानिक नजरिए को मजबूत आधार देता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बाल संत समागम द्वारा उनमें संतो पीर पैगंबरों के प्रति श्रद्धा अपने से बड़ों, माता-पिता, गुरुजनों के प्रति आज्ञाकारिता को समाहित करने का मजबूत माध्यम जो उनको गलत रास्तों पर जाने से रोकता है।

दिल्ली से पधारे  प्रदीप अरोड़ा ने हरिद्वार रोड बायपास स्थित निरंकारी सत्संग भवन के तत्वाधान में हजारों की संख्या में उमड़े जन सैलाब को सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश देते हुए भक्ति के मर्म पर प्रकाश डालते हुए  प्रदीप अरोड़ा  ने यह बात कही की भक्ति किसी उम्र की मोहताज नहीं होती, भक्ति भक्त और भगवान का ऐसा सहयोग सतगुरु के मार्गदर्शन से प्राप्त होता है,और बाल संतो को यह दृष्टि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त हुई।

बाल अवस्था में भक्ति का आरंभ हुआ और हम उन बाल महात्माओं को भी हमेशा याद करते हैं जैसे ध्रुव प्रहलाद इत्यादि जिन्होंने कम उम्र में इस भक्ति की  प्रकाष्ठा को प्राप्त करके अपने हर पहलू को मजबूत किया ।
उन्होंने आगे अपने विचारों में फरमाया कि आज इस बाल संत समागम में बाल संतों ने प्रस्तुत की अनेकों कलाकृतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि, निरंकारी मिशन सारी मानवता का मिशन है, यह मिशन वसुदेव कुटुंबकम, अनेकता में एकता, यूनिवर्सल ब्रदरहुड, जहां पर हर भाषा वेशभूषा को अपनाने वाला एक साथ बैठकर इस परमात्मा से जुड़कर हर एक से प्यार करता है ।

बाल समागम में आये हजारों बच्चों ने गढ़वाली, पंजाबी, हिन्दी, अंग्रेजी, व अन्य भाषाओं के माध्यम से भजन व निरंकारी मिशन की जानकारी साझी की।अलग अलग रंगों की पोशाक पहने बच्चों ने जब भजन की प्रस्तुति की तो पूरी संगत झूम उठी।
मसूरी ज़ोन के  हरभजन सिंह एवं स्थानीय संयोजक नरेश विरमानी  ने इस बाल संत समागम में पधारे सभी का आभार प्रकट किया।

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