उत्तराखंड के टिहरी जिले में दिवाली का त्योहार सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि साल में तीन बार मनाई जाती है
टिहरी – उत्तराखंड के पर्वतीय जिले टिहरी में दिवाली का त्योहार सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि साल में तीन बार मनाया जाता है। इस परंपरा की खासियत और स्थानीय रंगत इसे देशभर से अलग बनाती है।
पहली दिवाली- कार्तिक मास की अमावस्या को, जब पूरे देश में दिवाली मनाई जाती है।
दूसरी दिवाली – कुछ गांवों में विशेष धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग तिथि पर।
* तीसरी दिवाली- टिहरी झील विस्थापितों द्वारा अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए।
कैसे मनाते हैं दिवाली-
* स्थानीय मेले लगते हैं, जिसमें पारंपरिक नृत्य, गीत और हस्तशिल्प की झलक मिलती है।
* घरों को मिट्टी के दीयों और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया जाता है।
* देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ सामूहिक भोज और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
दिवाली का दृश्य नई टिहरी की पहाड़ियों पर जब रात के अंधेरे में दीयों की रौशनी बिखरती है, तो पूरा शहर एक चमकते हुए सपने जैसा लगता है।
इस परंपरा ने टिहरी को उत्तराखंड के सांस्कृतिक नक्शे पर एक खास पहचान दी है।

