सोमनाथ नक्षत्र वाटिका ट्रस्ट (राजीo)एवं ट्री बैंक के अंतर्गत Eppcc अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ गठन
मथुरा – बृज भूमि के ब्रिजकला मंच के ऑडोटोरियम में देश के कई राज्यों से आये पर्यावरण प्रेमी लोगों ने भाग लिया । सितम्बर माह 2025 में सोमनाथ नक्षत्र वाटिका ट्रस्ट (राजीo)एवं ट्री बैंक के अंतर्गत Eppcc(, Environment protection & pollution control council) का गठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया है।
जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक आपदाओं पर नियंत्रण करना है। समय की मार एवं बढ़ते प्रदूषण पर रोकथाम के उद्देश्य के लिए समस्त भारत के भिन्न भिन्न जिलों से पर्यावरण कर्मियों को सम्मानित किया गया ।
एवं विचारों को आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ0 रेणुका वाढवा विशिष्ट अतिथि डॉ0 रश्मि शर्मा एवं सोबेन्द्र सिंह शामिल रहे।डॉ0 रेणुका ने कहा कि आज पूरे देश में पर्यवरण दूषित होने के कारण सांसे लेना मुश्किल हो गया है ,पर्यावरण दूषित के कारण छोटी छोटी उम्र के बच्चों तक दमा रोग हो रहा है।अगर पर्यावरण को नहीं बचाया गया तो देश की आधी आबादी बीमारियों से ग्रसित हो जायेगी।
इसलिये ई पी पी सी सी ( Environment protection & pollution control council) पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण परिषद का गठन किया गया है ।डॉ0 रश्मि शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरे देश में मुहिम चलानी है ,इ पी पी सी सी का गठन सितम्बर माह 2025 में हुआ अभी तक लगभग पूरे देश से 2000 लोग इससे जुड़ चुके हैं। Eppcc और ट्री बैंक ने मिलकर एक ऐसी पेंसिल लॉन्च की है। जिसको बनाने में लकड़ी का नहीं।
बल्कि रद्दी का इस्तेमाल होता है और खत्म होने पर गमले में गढ़ने पर एक पौधा जन्म लेता है।जिससे पर्यावरण संरक्षण एवं बच्चों में जागरूकता और पेड़ो के कटाव को कम किया जा सकेगा। कार्यक्रम के सयोंजक उत्तराखंड से सोबेन्द्र सिंह ने उत्तराखंड के धराली का जिक्र करते हुए कहा कि पहाडों पर विकास के नाम पर हजारों पेडों की बलि दी जा रही है जिस कारण पूरा उत्तराखंड दैवीय आपदा की मार झेल रहा है ।
हमें पूरे देश में इस मुहिम को चलाना है ताकि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रह सके।इस कमेटी की फाउंडर डॉ0 प्रिया दत्ता ने विभिन्न राज्यों ( उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल उत्तर प्रदेश आदि )से आये पर्यावरण प्रेमियों का आभार प्रकट किया। जिन लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने अपने क्षेत्रों में काम किया उन्हें स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र भेंट किया।

