राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में चल रहे रजत जयंती सप्ताह का चौथा दिन
उत्तरकाशी – राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में चल रहे रजत जयंती सप्ताह का चौथा दिन लोक संस्कृति और उत्साह के रंगों से सराबोर रहा। सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग उत्तरकाशी के सांस्कृतिक दल के लोक गायकों और कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सोमेश्वर लोक गीत कला मंच के वरिष्ठ लोकगायक सेरुलाल ने वंदना स्तुति के साथ की। उसके बाद उन्होंने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किए। वहीं रामकौशल सांस्कृतिक दल ने नरो विजुला,थड्या चोंरी तू काई ना आ आई थी,ओटू वा बेलिना,सोने का झुमका और रासो लगाइदे मेरी चेता जैसे लोकप्रिय लोक गीतों से माहौल को सुरमयी बना दिया। जगदेई कला मंच के कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य और गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को झूमने पर विवश कर दिया। वहीं विभिन्न विद्यालयों के छात्राओं ने रंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष बड़ाहाट भूपेंद्र चौहान बतौर मुख्य अतिथि एवं नगर पालिका अध्यक्ष चिन्यालीसौड़ मनोज कोहली विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राज्य गठन के पच्चीस वर्षों की उपलब्धियों को आधार बनाकर आगामी पचास वर्षों के लिए बुनियादी सुविधाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सभी को मिलकर कार्य करना होगा। इस अवसर पर प्रोबेशन विभाग द्वारा विधवा पेंशन, परित्यक्ता विवाहित महिला पेंशन,मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों की पत्नियों हेतु पेंशन,अविवाहित महिलाओं के लिए पेंशन,मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना, क्षैतिज आरक्षण प्रमाणपत्र, स्पॉन्सरशिप योजना तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं मत्स्य विभाग द्वारा ट्राउट मछली उत्पादन सहित विभागीय योजनाओं से आर्थिकी सशक्तिकरण के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। उसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा कैरियर काउंसलिंग,राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर भाषण,वाद-विवाद,निबन्ध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता हुई।
कार्यक्रम में सभासद अमरीकन पुरी,आदित्य चौहान,प्रो. मधु थपलियाल,अम्बिका,मेजर आर.एस.जमनाल, सहायक निदेशक डेयरी पीयूष आर्य, सीवीओ एच.सी. बिष्ट,पर्यावरण विशेषज्ञ स्वजल प्रताप मटुड़ा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी,जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय जनता उपस्थित रही।

