उत्तराखंड

विधायक उमेश शर्मा काऊ का माफीनामा, FIR बरकरार शिक्षक संगठनों की मांगें कायम

देहरादून–  प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुए विवाद के बाद उमेश शर्मा काऊ द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगे जाने के बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। पुलिस में दर्ज FIR पर जांच जारी है और शिक्षक–कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि माफी स्वीकार्य है, लेकिन कानूनन कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।
घटना बीते सप्ताह देहरादून स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई, जहां एक प्रशासनिक मुद्दे को लेकर विधायक काऊ और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि बहस के दौरान धक्का-मुक्की और अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ।काऊ के समर्थकों ने मारपीट की जिसमें शिक्षा निदेशक चोटिल हुए। इसके बाद शिक्षा निदेशक की ओर से कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला कायम किया।
FIR में शामिल धाराएं
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में IPC की धारा 323 (मारपीट), 353 (सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य से रोकना), 504 (शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) तथा 147/149 (बलवा व सामूहिक अपराध) के तहत जांच चल रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। माफी दिए जाने से जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भाजपा कार्यालय में मीडिया के सामने विधायक काऊ ने कहा कि परिस्थितियां “गर्म हो गई थीं” और उनसे ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जिसके लिए वे खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन से शांति बनाए रखने की अपील की तथा आंदोलनरत शिक्षकों से काम पर लौटने का अनुरोध किया।

घटना के विरोध में शिक्षक–कर्मचारी संगठनों ने धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया था। माफी के बाद आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित किया गया, लेकिन संगठनों ने चेताया है कि यदि जांच में ढिलाई हुई तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा। इस बीच, सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षक संगठनों की मांगें
संगठनों की प्रमुख मांगों में दोषियों पर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई, कार्यस्थलों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों द्वारा दबाव या हिंसा की स्थिति में सख्त प्रावधान, और घटना में शामिल समर्थकों की पहचान कर कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि प्रशासनिक गरिमा और कार्यस्थल की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

माफी से राजनीतिक तापमान भले ही कुछ कम हुआ हो, लेकिन कानूनी प्रक्रिया और संगठनों की मांगों के चलते मामला अभी समाप्त नहीं माना जा रहा। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और सरकार की SOP इस प्रकरण की दिशा तय करेगी।

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