उत्तराखंड

युवाओं के अंदर साकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है निरंकारी मिशन- महादेव कुड़ियाल

देहरादून –  राजधानी देहरादून के पंजाबी कालोनी में सदगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपा से एक विशाल युवा सत्संग का आयोजन हुआ, सत्संग में सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर महादेव कुड़ियाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत किए।

उन्होंने अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए कहा कि आज का युवा देश और समाज का भविष्य है, इसलिए उसका सही दिशा में आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। केवल भौतिक शिक्षा और सफलता ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान को भी जीवन में समान महत्व देना चाहिए।
महादेव कुड़ियाल ने कहा कि सत्संग वह माध्यम है, जो व्यक्ति को सही और गलत का अंतर समझाता है। यह हमें जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है और भीतर की शांति प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से सत्संग में भाग लें, क्योंकि इससे मन में सकारात्मकता आती है और जीवन में अनुशासन विकसित होता है।
उन्होंने विशेष रूप से आज के युवाओं के सामने उपस्थित चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नशाखोरी, गलत संगत और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं को अपने लक्ष्य से भटका रहा है। ऐसे में जरूरी है कि युवा स्वयं को इन नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखें और अपने समय तथा ऊर्जा का सदुपयोग करें। उन्होंने कहा कि जो युवा अपने समय का सही उपयोग करता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है और समाज के लिए एक आदर्श बनता है।
महादेव कुड़ियाल ने सेवा, सिमरन और सत्संग के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि सेवा करने से मन में विनम्रता आती है और दूसरों के प्रति प्रेम की भावना विकसित होती है। सिमरन से आत्मा को शांति मिलती है और सत्संग से ज्ञान की प्राप्ति होती है। इन तीनों का संतुलन जीवन को सफल और सार्थक बनाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरु की शिक्षाओं पर चलना ही सच्चे जीवन का मार्ग है। गुरु हमें सत्य का बोध कराते हैं और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देते हैं। यदि युवा गुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो वे न केवल स्वयं का विकास कर सकते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
अंत में महादेव कुड़ियाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाएं और मानवता की सेवा को अपना कर्तव्य मानें। उन्होंने कहा कि प्रेम, भाईचारा और एकता का संदेश फैलाकर ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। सत्संग के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को अपने आचरण में उतारना ही सच्ची भक्ति है और यही जीवन की सच्ची सफलता भी है। देहरादून बाईपास भवन के मुखी ज्ञानेश्वर गुरंग ने आयी हुई समस्त संगत का आभार प्रकट किया।

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