उत्तराखंड

परमात्मा के बोध से मिटते हैं भेदभाव- सत्गुरु माता सुदीक्षा ज़ी महाराज

देहरादून – सत्गुरु माता सुदीक्षा महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी की छत्रछाया में रविवार को बालावाला स्थित शिवप्रिया फार्म, बांसवाड़ा में भव्य निरंकारी संत समागम आयोजित हुआ। समागम दिव्यता और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा। सत्गुरु माता सुदीक्षा महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जन्म केवल सांसारिक जीवन के लिए नहीं, बल्कि परमात्मा को जानकर उससे एकात्म होने के लिए है। यही मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि कण-कण में बसे परमात्मा का एहसास गुरसिख के जीवन में विनम्रता, दया, करुणा और प्रेम के भाव जगाता है। सत्गुरु माता जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जीवन यात्रा अलग होती है, इसलिए दूसरों का आंकलन करने के बजाय आत्ममंथन कर स्वयं को सुधारना चाहिए। परमात्मा का एहसास जीवन का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए, जो अनुमान या कल्पना से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष दर्शन, प्रेम, आस्था और भक्ति से मिलता है। जब मनुष्य गुरमत के मार्ग पर चलता है तो दिव्य गुण स्वतः विकसित होते हैं।उन्होंने कहा कि परमात्मा से प्रेम होने पर संपूर्ण सृष्टि से प्रेम हो जाता है और जाति, रूप-रंग, अमीर-गरीब जैसे भेदभाव मिट जाते हैं। सच्चा संत वही है जो मानवता को जोड़ता है, सबके प्रति समान भाव रखता है और मिलवर्तन के साथ जीवन जीता है। गुरु की शिक्षा केवल सुनने तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन में उतरे, तभी वास्तविक आध्यात्मिक परिवर्तन संभव है।समागम में गीतकारों, कवियों और विचारकों ने रचनाओं से हृदय की अनुभूतियों को व्यक्त किया। शब्द और स्वर आत्मिक आनंद और आध्यात्मिक उल्लास की अनुभूति करा रहे थे। श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। चारों ओर दिव्यता का वातावरण था। मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी का आभार जताया। उन्होंने प्रशासन के सहयोग, सेवादारों और श्रद्धालुओं के योगदान के लिए भी धन्यवाद दिया।

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