उत्तराखंड

श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री दोनों धामों में अब तक 7.44 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके है दर्शन

श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित

उत्तरकाशी – आस्था और अटूट विश्वास के बीच जनपद के दोनों धामों में चारधाम यात्रा का संचालन सुगम और सुव्यवस्थित ढंग से जारी है। कपाट खुलने के बाद से ही दोनों धामों में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन अनवरत बना हुआ है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में धामों में भारी संख्या में पहुंच रहे तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा तय किए गए रूट और ट्रैकों पर मुस्तैद व्यवस्थाओं के चलते यात्रा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है।

तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं।   दोनों धामों में कुल 36186 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। जिसमें श्री यमुनोत्री धाम में 18885 और श्री गंगोत्री धाम में 17301 श्रद्धालु शामिल हैं। इस प्रकार चालू यात्रा सीजन में अब तक दोनों प्रमुख धामों में दर्शन करने वाले कुल प्रगतिशील यात्रियों की संख्या 744379 तक पहुंच गई है।
​श्रद्धालुओं के साथ-साथ वाहनों के आवागमन को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। आज दोनों धामों के लिए कुल 3590 वाहनों (986 बड़े वाहन और 2604 छोटे वाहन) का सुरक्षित आवागमन हुआ। इसमें यमुनोत्री धाम के लिए 1940 वाहन और गंगोत्री धाम के लिए 1650 वाहन रवाना हुए। अब तक इस यात्रा मार्ग पर कुल 72440 पवाहनों के माध्यम से यात्रियों को सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जा चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देशों पर यातायात को सुव्यवस्थित रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और नोडल अधिकारी तैनात किये गए हैं।
​यात्रियों की सेहत और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार हेल्थ स्क्रीनिंग और परीक्षण शिविर संचालित किए जा रहे हैं। आज दोनों धामों में कुल 8829 यात्रियों की दैनिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई तथा 187 यात्रियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। यमुनोत्री मार्ग पर 5868 और गंगोत्री मार्ग पर 2961 यात्रियों की स्क्रीनिंग हुई। अब तक क्रमिक रूप से कुल 191926 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और 16601 यात्रियों का सफल स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जिससे यात्रियों को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की चिकित्सीय असहजता का सामना न करना पड़े।

 

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