उत्तराखंड

ग्राम उपलादेवरा में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन, वेदव्यास द्वारा वेदों का विभाजन एवं कलियुग प्रवेश प्रसंग का वर्णन

पुरोला  (उपला देवरा) – ग्राम उपलादेवरा स्थित भैरव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास डाo- किशोरी रतूड़ी शास्त्री ने भक्तों को श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए वेदव्यास जी द्वारा वेदों के अध्ययन, संरक्षण एवं विभाजन की कथा सुनाई।

कथा के दौरान बताया गया कि महर्षि वेदव्यास ने मानव कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए विशाल वेद ज्ञान को चार भागों—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—में विभाजित किया, ताकि सामान्य जन भी उनके ज्ञान को समझ सकें और जीवन में आत्मसात कर सकें। उन्होंने कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाले ज्ञान के स्रोत हैं।

इसके पश्चात कथा व्यास ने राजा परीक्षित और कलियुग प्रवेश का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब राजा परीक्षित अपने राज्य का भ्रमण कर रहे थे, तब उन्होंने धर्म और पृथ्वी को पीड़ित अवस्था में देखा। उसी समय कलियुग उनके सामने उपस्थित हुआ और राज्य में रहने की अनुमति मांगी। राजा परीक्षित ने धर्म की रक्षा करते हुए कलियुग को केवल उन स्थानों पर निवास की अनुमति दी जहां जुआ, मदिरापान, व्यभिचार, हिंसा तथा स्वर्ण के प्रति अत्यधिक लोभ हो। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया तथा भगवान के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कथा में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में सभी  ध्याणियों को व्यास गद्दी से सम्मानित किया गया। ग्रामवासियों सहित आसपास के क्षेत्रों से आए अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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