सऊदी अरब में सात वर्षों से फंसे गोरसाड़ा के इंद्र मणि नौटियाल की मदद को बढ़े हाथ
पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, विधायक सुरेश चौहान, दीपक बिजल्वाण, नवनीत उनियाल , रोशन रतूड़ी सहित कई समाजसेवी आए आगे
गोरसाड़ा (उत्तरकाशी) – डुंडा विकासखंड के गोरसाड़ा गांव निवासी इंद्र मणि नौटियाल के पिछले सात वर्षों से सऊदी अरब में फंसे होने का मामला सामने आने के बाद अब उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और समाजसेवी सक्रिय हो गए हैं। परिजनों की अपील के बाद क्षेत्र में व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, इंद्र मणि नौटियाल रोजगार के उद्देश्य से सऊदी अरब गए थे, लेकिन वहां परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वे सात वर्षों से अपने घर वापस नहीं लौट पाए। परिवार लगातार उनकी सकुशल वापसी की आस लगाए बैठा है। लंबे समय से आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे परिजनों ने केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण रूपये-51000, वर्तमान विधायक सुरेश चौहान रूपये-51000, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण रूपये-51000, उत्तराखंड क्रांति दल के प्रबल दावेदार नवनीत उनियाल रूपये -11000 का सहयोग किया तथा समाजसेवी रोशन रतूड़ी सहित कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की संवेदना से जुड़ा विषय है।
जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय तथा सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे और इंद्र मणि नौटियाल की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि विदेश में किसी भी भारतीय नागरिक के संकट में फंसने पर सरकार और प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं, क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी एकजुट होकर परिवार का समर्थन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सात वर्षों से अपने घर-परिवार से दूर रहना किसी भी व्यक्ति के लिए अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है। उन्होंने सरकार से मानवीय आधार पर शीघ्र हस्तक्षेप करने की मांग की है।
इंद्र मणि नौटियाल के परिजनों ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और उनके परिवार का सदस्य सुरक्षित अपने घर लौट सकेगा। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

