उत्तराखंड

नचिकेताताल के कायाकल्प को मिली रफ्तार, ईकोटूरिज्म से बढ़ेंगी पर्यटन की संभावनाएं

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में विकास कार्य तेज, 2453 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पौराणिक ताल को संवारने की पहल
उत्तरकाशी – जनपद उत्तरकाशी की प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में नचिकेताताल के समग्र कायाकल्प की कार्ययोजना को गति दी जा रही है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ईकोटूरिज्म विकास के कार्य किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इन प्रयासों से नचिकेताताल को पर्यटन के प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित करने के साथ ही स्थानीय क्षेत्र की पर्यटन आधारित आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।
जिला मुख्यालय से लगभग 29 किलोमीटर दूर चौरंगीखाल कस्बे से करीब तीन किलोमीटर पैदल दूरी पर स्थित नचिकेताताल प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक महत्त्व का अनूठा संगम है। समुद्र तल से लगभग 2453 मीटर की ऊंचाई पर घने जंगलों के बीच स्थित यह प्राकृतिक जलाशय करीब 200 मीटर लंबा, 30 मीटर चौड़ा और सात मीटर गहरा है। इसके आसपास बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू, रई, मुरेंड और देवदार के घने वन क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।
तीन साल की योजना से विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं
नचिकेताताल में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से तीन वर्षीय ईकोटूरिज्म विकास योजना स्वीकृत की गई है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त धनराशि से विभिन्न जनोपयोगी और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य किए गए हैं। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में ताल की परिधि के चारों ओर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए फुटपाथ और मजबूत रेलिंग का निर्माण कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के साथ निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य चौरंगीखाल से नचिकेताताल तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
आसपास के पर्यटन स्थलों को भी मिलेगी पहचान
नचिकेताताल के आसपास काणाताल, यमगुफा और खाल बुग्याल जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थल भी मौजूद हैं। इन स्थानों की जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि पर्यटक केवल ताल का भ्रमण करके वापस लौटने के बजाय आसपास के अन्य आकर्षक स्थलों का भी आनंद ले सकें। इससे क्षेत्र में पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं।
वर्ष 2025-26 में पहुंचे 2417 पर्यटक
उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नचिकेताताल क्षेत्र में 2379 भारतीय और 38 विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया। इस दौरान कुल 2417 पर्यटक यहां पहुंचे और 1,22,850 रुपये का राजस्व राजकीय कोष में प्राप्त हुआ।
नचिकेताताल प्राकृतिक जलस्रोतों से सिंचित है और स्थानीय ग्रामीणों की इससे गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में इसके विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। ईकोटूरिज्म की अवधारणा के अनुरूप विकास कार्यों में प्राकृतिक स्वरूप, वन संपदा और स्थानीय पारिस्थितिकी के संरक्षण को प्राथमिकता देना क्षेत्र के दीर्घकालिक हित में होगा।
नचिकेताताल के विकास की यह पहल उत्तरकाशी में पर्यटन की नई संभावनाओं को खोल सकती है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य समय पर पूरे हों, पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं मिलें और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

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