उत्तराखंड

तीन साल बाद टौंस वन प्रभाग को मिला डीएफओ, आशुतोष सिंह ने संभाली कमान

पुरोला – जनपद उत्तरकाशी के पुरोला टौंस वन विभाग को करीब तीन साल बाद नियमित डीएफओ मिला है। वन विभाग के अधिकारी आशुतोष सिंह ने डीएफओ के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनके कार्यभार संभालने के बाद वन विभाग में नई उम्मीद जगी है। क्षेत्र में वन संरक्षण, अवैध कटान, अवैध खनन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

आशुतोष सिंह को वन विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने का लंबा अनुभव है। वह वर्ष 2019 से 2021 तक बदरीनाथ वन प्रभाग में डीएफओ के पद पर तैनात रहे। इसके बाद वर्ष 2021 से 2022 तक हल्द्वानी में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर सेवाएं दीं। वर्ष 2022 से 2023 तक उन्होंने मसूरी में डीएफओ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2023 से 2024 तक वह कालागढ़ टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट में तैनात रहे। इसके बाद मार्च 2024 से 2026 तक पिथौरागढ़ में डीएफओ के पद पर सेवाएं दीं। अब उन्हें टौंस वन प्रभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद डीएफओ आशुतोष सिंह ने कहा कि उनका पहला प्रयास वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना रहेगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग अकेले वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण नहीं कर सकता। इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर चलना जरूरी है। लोगों को वन विभाग से जोड़कर संरक्षण कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि वन क्षेत्र में अवैध खनन और अवैध पेड़ों के कटान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागीय टीमों को क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वन क्षेत्रों में होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।

डीएफओ ने आगामी वनाग्नि सीजन को लेकर भी तैयारियां अभी से शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अप्रैल और मई में वनाग्नि की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फायर सीजन शुरू होने से पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करने, कर्मचारियों को तैयार रखने और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीणों को भी वनाग्नि से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा।

मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी विभाग गंभीर रहेगा। क्षेत्र में गुलदार सहित अन्य जंगली जानवरों के हमलों की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एवं बचाव की तैयारियां समय से शुरू की जाएंगी। डीएफओ ने कहा कि गुलदार या अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी मिलने पर विभागीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी तथा ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

लंबे समय बाद नियमित डीएफओ की तैनाती से टौंस वन प्रभाग में वन संरक्षण और विभागीय कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को भी उम्मीद है कि नए डीएफओ के अनुभव से क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

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