तिलक मिटाने की घटना महिलाओं और हिंदू आस्था का अपमान भाजपा सार्वजनिक रूप से मांगे माफी – शान्ति प्रसाद भट्ट
टिहरी – उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक के दौरान भाजपा नेता दुष्यंत गौतम के स्वागत के लिए मुख्य द्वार पर खड़ी सम्मानित महिलाओं द्वारा लगाए गए तिलक को दुष्यंत गौतम ने तत्काल अपने रुमाल से मिटा दिया, यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है।
हिंदू सनातन परंपरा में तिलक केवल माथे पर लगाया जाने वाला चिह्न नहीं, बल्कि आस्था, सम्मान, मंगल और संस्कार का प्रतीक माना जाता है। अतिथि के स्वागत में तिलक लगाना हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। ऐसे में स्वागत के लिए खड़ी सम्मानित महिलाओं द्वारा श्रद्धा और सम्मानपूर्वक लगाए गए तिलक को सार्वजनिक रूप से तत्काल मिटा देना न केवल उन महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है, बल्कि इससे सनातन हिंदू परंपराओं के प्रति असम्मान है।
भाजपा स्वयं को हिंदू संस्कृति और सनातन परंपराओं का सबसे बड़ा प्रहरी बताती है। ऐसे में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के व्यवहार से यदि हिंदू समाज और विशेषकर महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं, भाजपा को इस मामले पर मौन रहने के बजाय स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति बतानी चाहिए।
वह इस घटना पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे और महिलाओं तथा हिंदू समाज की भावनाएं आहत होने पर सार्वजनिक माफी मांगे।
राजनीति में विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन आस्था, संस्कृति और महिलाओं द्वारा किए गए पारंपरिक स्वागत का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उत्तराखंड की देवभूमि में हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान प्रत्येक राजनीतिक दल और प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अपने नेता के ऐसे व्यवहार का समर्थन करती है अथवा इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए उत्तराखंड की मातृशक्ति और प्रदेश की जनता से माफी मांगेगी।
ज्ञात हो कि यह वही नेता है, जिसका नाम उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP के रूप में सोशल मीडिया में चर्चित हुआ था और इन्होंने उत्तराखंड आना बंद कर दिया था।

