बागी भरपूर गांव में भैरव देवता की कैबिनेट में होते हैं कई महत्वपूर्ण फैसले
भरपूर गांव में सिद्धपीठ भैरव का भव्य मंदिर, दूर दूर से आते हैं मंदिर में भैरव के दर्शन करने
टिहरी – जनपद टिहरी के अंतर्गत बागी भरपूर गांव में भैरव देवता की परंपरा और आस्था आज भी ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। यहां भैरव देवता को केवल आराध्य देवता के रूप में ही नहीं, बल्कि गांव की सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णयों के केंद्र के रूप में भी माना जाता है। देवता के आंगन में होने वाली विशेष बैठक को स्थानीय लोग श्रद्धा से ‘भैरव देवता की कैबिनेट’ कहते हैं। इस कैबिनेट में गांव और क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब गांव में कोई महत्वपूर्ण सामाजिक, धार्मिक अथवा सामुदायिक विषय सामने आता है तो उसे देवता के दरबार में रखा जाता है। देवता के आंगन में ग्रामीण, देवता के पसवा, पुजारी तथा संबंधित लोग एकत्रित होकर विषय पर चर्चा करते हैं। इसके बाद परंपरागत रीति-रिवाजों और देवता की मान्यता के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
पूजारी गंगा प्रसाद पैन्यूली का कहना है कि देवता की कैबिनेट में होने वाले निर्णयों का उद्देश्य गांव में आपसी भाईचारा, शांति और सामाजिक समरसता बनाए रखना है। भूमि, गांव के सामूहिक कार्य, धार्मिक आयोजन, मेलों और पर्वों की व्यवस्थाओं सहित कई सामाजिक विषयों पर यहां चर्चा होने की परंपरा रही है। विवाद की स्थिति में भी दोनों पक्षों को देवता के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है।
भैरव देवता के आंगन में होने वाली यह बैठक ग्रामीणों के लिए किसी सामान्य पंचायत से अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। ग्रामीणों की आस्था है कि देवता के समक्ष लिया गया निर्णय सभी को स्वीकार्य होता है और इससे गांव में एकजुटता बनी रहती है।
बागी गांव की यह परंपरा उत्तराखंड की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत करती है। आधुनिक दौर में जहां सामाजिक व्यवस्थाओं में तेजी से बदलाव आ रहा है, वहीं पहाड़ के गांवों में देवता से जुड़ी ऐसी परंपराएं आज भी सामुदायिक एकता को मजबूत करने में भूमिका निभा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भैरव देवता की कैबिनेट केवल निर्णय लेने का मंच नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। देवता के आंगन में होने वाली बैठकों में लिए गए निर्णय ग्रामीणों के लिए सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सहमति का संदेश भी देते हैं।
भरपूर गांव में भैरव देवता का भव्य मंदिर है जिसमें उत्तराखंड से व बाहरी राज्यों के भक्त आते रहते हैं। भरपूर गांव के कालूड़ा परिवार भैरव देवता के मुख्य पसवा माने जाते हैं।

