मानव जीवन को सच्चे आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाते हैं सदगुरू-हेमराज शर्मा
देहरादून – राजधानी देहरादून के चंद्र बिहार कारगी चौक कालोनी में एक विशाल निरंकारी सन्त समागम का आयोजन किया गया। केंद्रीय ज्ञान प्रचारक हेमराज शर्मा ने समागम में आये सैकड़ों अनुयायियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सदगुरू माता सुदीक्षा जी महाराज आज पूरे विश्व में मानव जीवन को सच्चे आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाने का संदेश दे रही हैं, उनके अनुसार, मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है जब वह परमात्मा की सच्ची पहचान कर लेता है और अपने भीतर प्रेम, सेवा तथा विनम्रता के गुण विकसित करता है। 
केवल धार्मिक ग्रंथों को पढ़ लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईश्वर का साक्षात ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) प्राप्त करना आवश्यक है। यह ज्ञान किसी सतगुरु की कृपा से ही संभव होता है। जब मनुष्य को ईश्वर का अनुभव हो जाता है, तब उसके जीवन में अहंकार समाप्त हो जाता है और वह दूसरों के प्रति दया, करुणा और प्रेम का भाव रखने लगता है।
वे मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। उनके विचारों में जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। वे कहते हैं कि सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे के साथ समानता और भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए। यही सच्ची इंसानियत है और यही जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिये।सदगुरू प्रेम और सहिष्णुता पर विशेष जोर देते हैं।
उनके अनुसार, आज के समय में समाज में बढ़ती नफरत, हिंसा और असहिष्णुता को समाप्त करने का एकमात्र उपाय प्रेम है। जब मनुष्य अपने भीतर प्रेम का भाव विकसित करता है, तो वह न केवल स्वयं सुखी रहता है, बल्कि अपने आसपास के वातावरण को भी सकारात्मक बना देता है।
सच्ची भक्ति वही है जिसमें निःस्वार्थ सेवा का भाव हो। दूसरों की सहायता करना, जरूरतमंदों के काम आना और समाज के कल्याण के लिए कार्य करना ही वास्तविक धर्म है। सेवा से मनुष्य का अहंकार कम होता है और उसका मन शुद्ध होता है।
इसके साथ ही, वे अहंकार को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं। उनका कहना है कि जब तक व्यक्ति अपने अहंकार को नहीं छोड़ता, तब तक वह आध्यात्मिक उन्नति नहीं कर सकता। विनम्रता और सरलता ही व्यक्ति को महान बनाती है।

हेमराज शर्मा सत्संग के महत्व को भी बताते हैं कि अच्छे विचारों और अच्छी संगति से ही मनुष्य का जीवन बदल सकता है। सत्संग से व्यक्ति को सही दिशा मिलती है और वह अपने जीवन को सकारात्मक बना पाता है।संगत में आये कई युवाओं ने भी अपने विचार भी साझे किये।हरिद्वार रोड बाईपास सत्संग भवन के इंचार्ज ज्ञानेश्वर गुरंग ने आयी हुई संगत का आभार प्रकट किया।

