मानवता के सच्चे संत थे निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज
प्रेम, सेवा और एकता का जीवन-संदेश आज भी प्रेरणास्रोत
देहरादून – निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का जीवन मानवता, प्रेम, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण रहा। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को समाज को जोड़ने, जाति-धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत की राह दिखाने और आत्मज्ञान के माध्यम से मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का जन्म 23 फरवरी 1954 को दिल्ली में हुआ। वे बचपन से ही शांत, विनम्र और सेवा-भाव से परिपूर्ण थे। आध्यात्मिक वातावरण में उनका पालन-पोषण हुआ, जिससे जीवन के प्रारंभिक वर्षों में ही उन्हें आत्मज्ञान और मानव मूल्यों की गहरी समझ प्राप्त हुई।
वर्ष 1980 में वे संत निरंकारी मिशन के चौथे सतगुरु बने। उनके नेतृत्व में मिशन ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अभूतपूर्व विस्तार किया। उन्होंने सत्संगों के माध्यम से लाखों लोगों को आत्मज्ञान, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया।
बाबा हरदेव सिंह जी महाराज का मूल मंत्र था—
“मानवता ही सच्चा धर्म है।”
उन्होंने हमेशा कहा कि जब तक इंसान इंसान से प्रेम नहीं करेगा, तब तक समाज में शांति संभव नहीं। उनके प्रवचनों में यह स्पष्ट झलकता था कि सभी धर्मों का सार प्रेम, करुणा और सेवा है।
उनके मार्गदर्शन में निरंकारी मिशन द्वारा अनेक सामाजिक कार्य किए गए—
रक्तदान शिविर
स्वच्छता अभियान
वृक्षारोपण
स्वास्थ्य शिविर
प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
इन सेवाओं के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि सेवा केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति है।
13 मई 2016 को कनाडा में एक सड़क दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया। यह खबर सुनते ही देश-विदेश में फैले लाखों अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर हुआ, जहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी।
आज भी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की शिक्षाएँ निरंकारी मिशन के माध्यम से जीवित हैं। उनकी पुण्यतिथि को “समर्पण दिवस” के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सेवा, सत्संग और मानव कल्याण के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
प्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीं
सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं
मानवता से बड़ा कोई सत्य नहीं
निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनका विचार, उनका संदेश और उनका प्रेम आज भी करोड़ों दिलों में जीवित है।

