उत्तराखंड

जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’ अभियान का भव्य समापन: विकास और विश्वास की नई इबारत

 

जनभागीदारी से जनकल्याण तक ऐतिहासिक अभियान का गौरवपूर्ण समापन

जनता की समस्याओं के निराकरण और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन होता रहेगा –  जिलाधिकारी

उत्तरकाशी – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  के नेतृत्व और जन-कल्याण को संकल्पित महत्वकांक्षी अभियान ‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’ का सफलतापूर्वक समापन हो गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के कुशल मार्गदर्शन और प्रशासनिक तत्परता के चलते इस अभियान ने न केवल जन-समस्याओं के समाधान का नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि शासन और जनता के बीच की दूरी को भी खत्म कर दिया है।

शिविरों के माध्यम से घर-द्वार पहुँचा प्रशासन

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित किया। जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से लेकर जनपद की सभी न्याय पंचायतों में कुल 43 विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाना और उनकी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना था।

सहभागिता और जन-विश्वास का सैलाब, शिकायतों का त्वरित समाधान मौके पर ही मिली राहत

इस अभियान में कुल 52250 नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अभियान के दौरान कुल 1685 शिकायतें दर्ज की गईं। ‘त्वरित न्याय’ के सिद्धांत पर चलते हुए, प्रशासन ने सक्रियता दिखाई और इनमें से 1098 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों के लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध सीमा के भीतर समाधान के कड़े निर्देश दिए गए हैं। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कुल 28211 लोग सीधे तौर पर लाभान्वित हुए। लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, पेंशन स्वीकृति, आयुष्मान कार्ड और अन्य सरकारी लाभों का वितरण कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि शासन–प्रशासन की प्राथमिकता के आधार आयोजित इस महत्वकांक्षी अभियान का उद्देश्य था कि जनता को उनके द्वार पर सभी लाभ उपलब्ध कराए जाए ताकि जनता को छोटे–छोटे कार्यों के लिए मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। प्रशासन ने पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ हर व्यक्ति की बात सुनी है। अभियान की समाप्ति मात्र एक पड़ाव है, जनता की समस्याओं के निराकरण और योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन होता रहेगा।

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