आजादी के दशकों बाद भी अंधेरे में दो राजस्व गांव, डोखरियानी और स्यालुका आज तक बिजली से वंचित
सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर विकास के ढोल पीट रही है जमीनी हकीकत कुछ और
विधायक दुर्गेश्वर लाल के सामने ग्रामिणों ने कई बार रखी समस्या
विद्युत विभाग ने वन विभाग की अनुमति न मिलने से झाड़ा पल्ला
पुरोला (उत्तरकाशी) – जनपद उत्तरकाशी के विकास खंड पुरोला के अंतर्गत आने वाले राजस्व गांव डोखरियानी और स्यालुका में लगभग 150 परिवार आज भी मूलभूत सुविधा बिजली से वंचित हैं। आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी इन गांवों तक विद्युत आपूर्ति नहीं पहुंच पाई है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों के समक्ष मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
दोनों गांवों के लोग आज भी रात के समय सौर लैंप, लालटेन और अन्य वैकल्पिक साधनों के सहारे जीवनयापन करने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। मोबाइल फोन चार्ज करने जैसी सामान्य सुविधा के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर दूर अन्य गांवों का रुख करना पड़ता है। बिजली के अभाव में घरेलू कार्यों के साथ-साथ छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों तक सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन दोखरियानी और स्यालुका जैसे राजस्व गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। उनका कहना है कि यदि शीघ्र विद्युत लाइन बिछाकर बिजली उपलब्ध कराई जाए तो ग्रामीणों का जीवन काफी आसान हो जाएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा संचार जैसी सुविधाओं में भी सुधार आएगा।
वीरेंद्र सिंह रावत जिला अध्यक्ष वी एच पी ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन देने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों से भी इस संबंध में अनुरोध किया गया,9 जुलाई को सीडीओ के समक्ष विलोक पुरोला में विद्युत विभाग के सहायक अभियंता व जे ई को जब पूछा गया तो उन्होंने अपनी बला वन विभाग के सिर डाल दी की वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण कार्य नहीं हो पा रहा है,लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग से मांग की है कि दोनों गांवों का शीघ्र सर्वे कर विद्युत लाइन बिछाने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे लोगों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं बल्कि आधुनिक जीवन की बुनियादी आवश्यकता है। सरकार की विभिन्न योजनाओं का पूरा लाभ भी तब तक नहीं मिल सकता, जब तक गांवों में नियमित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सभी की निगाहें ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब डोखरियानी और स्यालुका गांवों के घरों में बिजली की रोशनी पहुंचेगी और दशकों पुराना इंतजार खत्म होगा।

